Monday, 3 April 2017

सूरज ताका धीरे से

Gud morning🍁
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रात की काली चुनर उठाकर
सूरज ताका धीरे से
अलसाये तन बोझिल पलकें
नींद टूट रही धीरे से
थोड़ा सा सो जाऊँ और पर
दिन चढ़ आया धीरे से
कितनी जल्दी सुबह हो जाती
रात क्यूँ होती है धीरे से
खिड़की से झाँक गौरेया गाये
चूँ चूँ चीं चीं धीरे से
गुलाब,बेली की सुंगध से महकी
हवा चली है धीरे से
किरणों के छूते जगने लगी धरा
प्रकृति कहे ये धीरे से
नियत समय पर कर्म करो तुम,
सूरज सिखलाये धीरे से।
 
                          #श्वेता🍁




Saturday, 1 April 2017

थका हुआ दर्द

दर्द थका रोकर अब बचा कोई एहसास नही
पहचाने चेहरे बहुत जिसकी चाहत वो पास नही

पलभर के सुकूं को उम्रभर का मुसाफिर बना
जिंदगी में कहीं खुशियों का कोई आवास नहीं

बादलों की सैर कर लौट आना है वापस फिर
टहनी पर ही रहना घर परिंदों का आकास नहीं

दो जून की रोटी भी मयस्सर मुश्किल से हो जिसे
उसके जीवन में त्योहार का कोई उल्लास नहीं

टूट जाता है आसानी से धागा दिल के नेह का
समझो वहाँ मतलब था प्यार का विश्वास नहीं

   #श्वेता🍁




मौन आहट

मौन आहट
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बदलते मौसम की सुगबुगाहट है,
तपती किरणों की चिलचिलाहट है।

झुलसने लगे बाग के फूल सारे अब,
पेड़ों को भी अब  छाँव की चाहत है।

दिन चढ़ते ही चुंधियाने लगती है आँखें,
गरम थपेड़ो में तन में कसमसाहट है।

अब सूखने लगे है नीर जलाशयों में,
खगवृंदों में जल के लिए अकुलाहट है।

क्या बच्चे,क्या बूढ़े हर उम्र को चाहिए ,
अपने तन मन के लिए थोड़ी तरावट है।

तपते दिन उमस भरी रातों से व्याकुल,
प्रकृति भी स्तब्ध देख रही बदलाहट है।

मौसम शुरूआत में ही तपती धरती सारी,
पर्यावरण से खेलने से सजा की बुलाहट है।

हाथ में अपने है संतुलित करना पर्यावरण को,
वरना सुनते रहो जो विनाश की मौन आहट है।

                                                  #श्वेता🍁


तेरी सुगंध

जबसे आये हो ज़िदगी के चमन में,
हृदय तेरी सुगंध से सुवासित है।
नहीं मुरझाता कभी भी गुलाब प्रेम का,
खिली मुस्कान लब पे आच्छादित है।
कोई काँटा चुभ भी जाए अगर दर्द का,
तुमसे हरपल में खुशी समाहित है।
मेरे जीवन की बहारें कौन कम करे जब,
तेरे साथ से मौसम परिभाषित  है।
                                             #श्वेता🍁

Friday, 31 March 2017

स्मृतियों का ताजमहल


समेटकर नयी पुरानी
नन्ही नन्हीं ख्वाहिशें,
कोमल अनछुए भाव
पाक मासूम एहसास,
कपट के चुभते काँटे
विश्वास के चंद चिथड़़े,
अवहेलना के अगूंज
बेरूखी से रूखे लफ्ज़,
और कुछ रेशमी सतरंगी
तितलियों से उड़ते ख्वाब,
बार बार मन के फूलों
पर बैठने को आतुर,
कोमल नाजुक खुशबू में
लिपटे हसीन लम्हे,
जिसे छूकर महकती है
दिल की बेरंग दिवारे,
जो कुछ भी मिला है
तुम्हारे साथ बिताये,
उन पलों को बाँधकर
वक्त की चादर में लपेट
नम पलकों से छूकर,
दफन कर दिया है
पत्थर के पिटारों में,
और मन के कोरे पन्नों
पर लिखी इबारत को
सजा दिया है भावहीन
खामोश संगमरमर के
स्पंदनविहीन महलों में,
जिसके खाली दीवारों पर
चीखती है उदासियाँ,
चाँदनी रातों में चाँद की
परछाईयों में बिसूरते है
सिसकते हुए जज्बात,
कुछ मौन संवेदनाएँ है
जिसमें तुम होकर भी
कहीं नहीं हो सकते हो,
खामोश वक्त ने बदल दिया
सारी यादों को मज़ार में,
बस कुछ फूल है इबादत के
नम दुआओं में पिरोये
जो हर दिन चढ़ाना नहीं भूलती
स्मृतियों के उस ताजमहल में।

       #श्वेता🍁

नीरवता से जीवन की ओर

अभी अंधेरे की चादर
पसरी है बाहर,
अपने कच्चे पक्के छोटे बडे
घरौंदों मे खुद को समेटे
गरम लिहाफों को लपेटे
सुख की नगरी मे विचरते
जहान के झमेले से दूर
सब सुखद नींद मे है,
मेरे छत के पास
उस पीपल मंे हल्की हल्की
सुगबुगाहटें होने लगी,
रात थकी सी चुपचाप
तन्हा राहगीर सी
उजाले के आस में
अपने विश्राम के इंतज़ार में हो,
आसमां का एक कोना
अब स्याह से रक्तिम होने लगा
चिड़ियों की चीं चीं बढ़ने लगी
दूर मंदिर में घंटियों का
मधुर स्वर रस घोल गया
अंतिम तारा भी खो गया,
समन्दर की नीले लहरों में
रतनारी  बड़ी सी बिदियाँ
नभ के माथे पे उदित हुई,
सरसराती शीतल पवन
हौले से कलियों को चूमने लगी
बूंदें ओस की दूबों पर
बूटों से झिलमिलाने लगे
झुंड पंक्षियों के झूमने लगे,
फुदक फुदक कर.गौरैया
मे नृत्य दिखाने लगी
एक नयी सुबह ने पलकें
अपनी खोली है फिर से
आपके जीवन में नयी आशा
नवजीवन का संचरण करने
बाहों को पसारे मुस्कुराईये
दिल से स्वागत कीजिए
अपने जीवन के एक नये दिन का।

     #श्वेता🍁



Thursday, 30 March 2017

मेरे महकते एहसास तुम

मेरे दिल को छू गये हो तुम,
एहसास मेरा चमन हो गया।

खुशबू बन गये तुम जेहन के,
गुलाब सा तन बदन हो गया।

पंखुड़ियाँ बिखरी हवाओं में,
चाहत फैला गगन हो गया।

ज़माने के शोर से अन्जान हूँ,
खुमारी में डूबा ये मन हो गया।

महकती साँसे कहने लगी है,
तुझसे मोहब्बत सजन हो गया।

न टूटे कभी  नेह का ये बंधन,
दिल से दिल का लगन है गया।

         #श्वेता🍁

  

रिश्ता अन्जाना हो गया

तुमसे बिछड़े तो इक ज़माना हो गया,
जख्म दिल का कुछ   पुराना हो गया।

टीसती है रह रहकर  यादें बेमुरव्वत,
तन्हाई का खंज़र कातिलाना हो गया।

नमी पलकों की पूछती है दरोदिवारों से,
हर आहट से क्यूँ रिश्ता अन्जाना हो गया।

लहर मोहब्बत की नहीं उठती है दरिया में,
अब साहिल ही समन्दर से बेगाना हो गया।

रोज ही टूटकर बिखरते है फूल सेहरा में,
बहारों का न आना तो इक बहाना हो गया।
 
    #श्वेता🍁

Tuesday, 28 March 2017

ढलती शाम

बस थोड़ी देर और ये नज़ारा रहेगा
कुछ पल और धूप का किनारा रहेगा

हो जाएँगे आकाश के कोर सुनहरे लाल
परिंदों की खामोशी शाम का इशारा रहेगा

ढले सूरज की परछाई में चिराग रौशन होगे
दिनभर के इंतज़ार का हिसाब सारा रहेगा

मुट्ठियों में बंद कुछ ख्वाब थके से लौटेगे
शज़र की ओट लिये एक चाँद आवारा रहेगा

अँधेरों की वादियों में तन्हाईयाँ महकती है
सितारों की गाँव में चेहरा बस तुम्हारा रहेगा


         #श्वेता🍁



चूड़ियाँ

छुम छुम छन छन करती
कानों में मधुर रस घोलती
बहुत प्यारी लगी थी मुझको
पहली बार देखी जब मैंने
माँ की हाथों में लाल चूूड़ियाँ
टुकुर टुकुर ताकती मैं
सदा के लिए भा गयी
अबोध मन को लाल चूड़ियाँ
अपनी नन्ही कलाईयों में
कई बार पहनकर देखा था
माँ की उतारी हुई नयी पुरानी
खूब सारी काँच की चूड़ियाँ

वक्त के साथ समझ आयी बात
कलाई पर सजी सुंदर चुड़ियाँ
सिर्फ एक श्रृंगारभर नहीं है
नारीत्व का प्रतीक है ये
सुकोमल अस्तित्व को
परिभाषित करती हुई
खनकती काँच की चूड़ियाँ
जिस पुरुष को रिझाती है
सतरंगी चुड़ियों की खनक से
उसी के बल के सामने
निरीह का तमगा पहनाती
ये खनकती छनकती चूड़ियाँ

ब्याह के बाद सजने लगती है
सुहाग के नाम की चूड़ियाँ
चूड़ियों से बँध जाते है
साँसों के आजन्म बंधन
चुड़ियों की मर्यादा करवाती
एक दायित्व का एहसास
घरभर में खनकती है चुड़ियाँ
सबकी जरूरतों को पूरा करती
एक स्वप्निल संसार सजाती
रंग बिरंगी काँच  की चूड़ियाँ

चूड़ियों की परिधि में घूमती सी
अन्तहीन ख्वाहिशें और सपनें
टूटते,फीके पड़ते,नये गढ़ते
चुड़ियों की तरह ही रिश्ते भी
हँसकर रोकर सुख दुख झेलते
पर फिर भी जीते है सभी
एक नये स्वप्न की उम्मीद लिए
कलाईयों में सजती हुई
नयी काँच चूड़ियों की तरह
जीवन भी लुभाता है पल पल
जैसे खनकती काँच की चूड़ियाँ

               #श्वेता🍁

सुरमई अंजन लगा

सुरमई अंजन लगा निकली निशा। चाँदी की पाजेब से छनकी दिशा।। सेज तारों की सजाकर  चाँद बैठा पाश में, सोमघट ताके नयन भी निसृत सुधा...