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Tuesday, 11 April 2017

पूनम की रात

चाँदनी मृग छौने सी भटक रही
उलझी लता वेणु में अटक रही

पूनम के रात का उज्जवल रुप
दूध में केसरी आभा छिटक रही

ओढ़ शशि धवल पुंजों की दुशाला
निशि के नील भाल पर लटक रही

तट,तड़ाग,सरित,सरोवर के जल में
चाँदनी सुधा बूँदो में है टपक रही

अधखुली पलकों को चूम समाये
ख्वाब में चाँदी वरक लगाए लिपट रही

            #श्वेता🍁

ठाठ पत्तों के उजड़ रहे है

टूटकर फूल शाखों से झड़ रहे है
ठाठ जर्द पत्तों के उजड़ रहे है

भटके परिंदे छाँव की तलाश में
नीड़ो के सीवन अब उधड़ रहे है

अंजुरी में कितनी जमा हो जिंदगी
बूँद बूँद पल हर पल फिसल रहे है

ख्वाहिशो की भीड़ से परेशान दिल
और हसरत आपस में लड़ रहे है

राह में बिछे फूल़ो का नज़ारा है
फिर आँख में काँटे कैसे गड़ रहे है

       #श्वेता🍁