Search This Blog

Saturday, 22 April 2017

रातभर

आपकी याद रह रह के आती है रात भर
चाँदनी पल पल दिल दुखाती है रातभर

कभी जलती कभी बुझती है धीमे धीमे
शमाँ पलकों पे झिलमिलाती है रातभर

इक खुशबू भीनी भीनी सी मदहोश करे *
एक तस्वीर मीठी से मुस्कुराती है रात भर

हर आहट पे गुमा आपका ही होता है
हवाएँ आपका एहसास दिलाती है रात भर

ख्याल आपका दिल को बहलाता है मेरे
आपका हो जाने की तमन्ना सताती है रात भर*
 
      #श्वेता🍁


धरती बचाओ

जनम मरण का खेल तमाशा
सुख दुख विश्वास अविश्वास
प्रेम क्रोध सबका संगम है
कर्मभूमि सबके जीवन की
धरती माँ का यही अँचल है
नहीं किसी से करती  भेद
सबको देती एकसमान भेंट
रंग बिरंगे मौसम कण कण में
पल पल करवट लेते क्षण में
कहीं हरीतिमा कही रेतीला
कही पर्वत पर बर्फ का टीला
ऊँची घाटी विस्तृत बगान
सब सुंदर पृथ्वी की जान
कल कल बहती जलधारा है
विशाल समन्दर बड़ा खारा है
बर्फ से ढका हुआ ध्रुव सारा है
कहीं उगलता आग का गुब्बारा है
चहकते पंछी के कलरव नभ में
असंख्य विचित्र जीव है जग में
अद्वितीय अनुपम रचना पर मोहित
प्रभु के हृदय पर धरा सुशोभित

पर मौन धरा का रूदन अब
तुमको ही समझना होगा
जितना दुलार मिला है धरती से
उतना ही तुम्हें वापस देना होगा
हे मानव तुम्हें ही अपने हाथों से
धरा के विनाश को रोकना होगा
वृक्षों को नष्ट कर कंकरीट न बोओ
वरना भविष्य में तुमको रोना होगा
अमृत है जल जीवन के लिए
न बहाया करो कभी व्यर्थ में
फिर बूँद बूँद को तरसना होगा
सबसे पहला घर धरा है तुम्हारा
ये विनष्ट हुआ तो जीवन क्या होगा
अपने घर की हर संपदा को तुमको
अपने प्रयास से सहेजना होगा
सुनो विनाश के बढ़ते कदमों की चाप
जो निगल रहा है सबकुछ चुपचाप
अब भी वक्त है सचेत हो जाओ
धरा की तुम छतरी बन जाओ

धरोहर समेटो ।धरती बचाओ।जीवन बचाओ।

       #श्वेता🍁