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Friday, 28 July 2017

आँखें


तुम हो मेरे बता गयी आँखें
चुप रहके भी जता गयी आँखें

छू गयी किस मासूम अदा से
मोम बना पिघला गयी आँखें

रात के ख्वाब से हासिल लाली
लब पे बिखर लजा गयी आँखें

बोल चुभे जब काँटे बनके
गम़ में डूबी नहा गयी आँखें

पढ़ एहसास की सारी चिट्ठियाँ
मन ही मन बौरा गयी आँखें

कुछ न भाये तुम बिन साजन
कैसा रोग लगा गयी आँखें

     #श्वेता🍁

*चित्र साभार गूगल*