मन के पाखी
*हिंदी कविता* अंतर्मन के उद्वेलित विचारों का भावांकन। ©श्वेता सिन्हा
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Saturday, 18 February 2017
ऐ दिल,चल तू संग मेरे
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ऐ दिल,तू चल संग मेरे मेरे ख्यालों के हसीन दुनिया में... जहाँ हूँ मैं और तुम हो उस हसीन दुनिया मे जाड़ों की नरम धूप सी ओढ़कर तेर...
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Friday, 17 February 2017
तुम्हारी सदा
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तन्हाई में बिखरी खुशबू ए हिना तेरी है वीरान खामोशियों से आती सदा तेरी है टपक टपक कर भरता गया दामन मेरा फिर भी खुशियों की माँग रहे दुआ...
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वादा
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तुमको ही चाहा है दिल ने बस तुमको ही चाहेगे तेरे दर्द में हमदम मेरे हमसाया बन जायेगे अपने माला के मनके में तेरा ही नाम सजायेगे पलकों क...
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कर्मपथ
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खो गया चंदा बुझ गया दीपक जाग उठा अंबर का आँचल टूटा मौन खिलखिलायी धरा पौधै सँवरे बाग है निखरा धुल गये फूलों के रूख़सार उठाकर उदास रात का...
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Thursday, 16 February 2017
यादें
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ये साँसों से लिपटी हुई गमों की गर्द दिल की बेवजह तड़प रह रह कर कसकती चाह कर भी नहीं मिटती बाँध रखा हो मानो अपनी परछाई से तोड़कर सारी ज...
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इज़हार ए मोहब्बत
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दिल की हर बात जो हम कह नही पाते है कभी फूल कभी बादल कभी चाँद कभी तारों से अपने दिल का हाल सुनाते है हवाओं को चूमकर हज़ारों पैगा...
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सोचती हूँ अक्सर..
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सोचती हूँ अक्सर तुम गुजरो कभी मुझमें होकर छूकर एहसास मेरे कभी देखो नज़रभर कभी चुन लो मुझे मोतियों की तरह उठा लो अंजुरी भर फिर बैठकर ...
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