Thursday, 29 March 2018

राष्ट्रधर्म



धर्म के नाम पर 
कराह रही इंसानियत
राम,अल्लाह मौन है 
शोर मचाये हैवानियत

धर्म के नाम पर
इंसानों का बहिष्कार है
मज़हबी नारों के आगे
मनुष्यता बीमार है

खून को पानी बना के
बुझ सकेगी प्यास क्या?
चीत्कार को लोरी बना
कट सकेगी रात क्या?

न बनो कठपुतलियाँ
ज़रा विवेक से काम लो,
राम-रहीम के आदर्श को
न छ्द्म धर्म का नाम दो।

धर्म के नाम पर
मत बाँटो इन्सानों को,
अपने भीतर उग आये
काटो ईष्यालु शैतानों को

लफ़्जों की लकीर खींच
न नफरतों के कहर ढाओ
मार कर विष टहनियों को
सौहार्द्र का एक घर बनाओ

मज़हब़ी पिंज़रों से उड़कर
मानवता का गीत गाओ 
दिल से दिल को जोड़कर
राष्ट्रधर्म का संकल्प उठाओ

    -श्वेता सिन्हा

24 comments:

  1. वाह...
    साधुवाद
    सादर

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    1. आभार दी:)
      तहेदिल से शुक्रिया आपके आशीष का।

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  2. बहुत उम्दा
    खूबसूरत भाव से महकती रचना

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    1. जी,बहुत आभार लोकेश जी।
      तहेदिल से शुक्रिया।

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  3. आपका संकल्प सही है ...
    राष्ट्रधर्म का पालन होना चाहिए न की अपने अपने स्वार्थ के लिए धर्म का प्रयोग ... पहले देश फिर कुछ भी दूसरा होना चाहिए ... लाजवाब रचना है ...

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    1. जी सही कहा आपने नासवा जी।
      धर्म के नाम पर हो रही अराजकता ने मन दुखी कर रखा है।
      अति आभार आपका नासवा जी।

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  4. बहुत सुंदर ! जागृति का संदेश देती,देशप्रेम को जगाने व भेदभाव मिटाने को प्रेरित करती हुई रचना !!!

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    1. अति आभार आपका मीना जी। सस्नेह शुक्रिया आपका।नेह बनाये रखे।

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  5. धर्म के नाम पर
    इंसानों का बहिष्कार है
    मज़हबी नारों के आगे
    मनुष्यता बीमार है
    एकदम सटीक ....धर्म के नाम पर देश में अराजकता फैलायी जा रही है
    बहुत ही सुन्दर ...
    लाजवाब...

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    1. आपकी प्रतिक्रिया ने उत्साह से भर दिया सुधा जी। सही कहा आपने धर्म के नाम पर फैली अराजकता में निर्दोष मासूमों का दर्द कौन समझता है सब अपनी दुकान चलाने में लग जाते है।
      अति आभार आपका सुधा जी।
      नेह बनाये रखे।

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  6. बहुत सुन्दर रचना
    बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिए

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    1. अति आभार आपका नीतू जी।
      हृदयतल से बहुत शुक्रिया।

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  7. आदरणीय श्वेता जी ,
    बेहद असरदार कविता..... धर्म कोइ भी हो हमारा ही होता है और धर्म जोड़ना सिखाता है तोडना नहीं।
    सादर

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    1. सही कहा आपने अपर्णा जी,धर्म को जोड़-तोड़ कर कुछ लोग बेबसोंं का फायदा उठाते है।
      अति आभार आपका हृदयतल से शुक्रिया जी।

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  8. वाह!!बहुत खूबसूरत रचना !!सही है श्वेता ,मानवता का गीत गाना ही होगा ..।

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    1. अति आभार शुभा दी। काश कि सब ये बातें समझ पाते, स्नेह बनाये रखे।

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  9. वाह श्वेता राष्ट्र धर्म पर बहुत सुंदरता से रचना के माध्यम से आपने बताया बहुत सुंदर भावों का समन्वय ।
    साधुवाद।
    ढेर सा स्नेह

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    1. अति आभार दी हृदयतल से शुक्रिया आपका।
      सबसे बड़ा धर्म तो राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निष्ठा से पालन है न।
      आपका स्नेह सदैव.अपेक्षित है।
      अति आभार दी।

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  10. मज़हब़ी पिंज़रों से उड़कर
    मानवता का गीत गाओ
    दिल से दिल को जोड़कर
    राष्ट्रधर्म का संकल्प उठाओ
    वाव्व...स्वेता, राष्ट्रधर्म से ओतप्रोत बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति।

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    Replies
    1. अति आभार ज्योति दी।
      आपने रचना पसंद की बहुत अच्छा लगा।
      सस्नेह.शुक्रिया दी।

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  11. वाह दीदी जी उत्क्रष्ट रचना है ये
    आजकल जो माहौल बना है वो निराशाजनक है सबके आँखों पर पट्टी बंध गयी है आपकी ये रचना लोगों के आँख से पट्टी हटाने में पूर्ण सहयोग करेगी लोगों को सत्य से अवगत करायेगी आपकी ये रचना आज के समय की माँग है
    नमन है आपकी इस रचना को 👌👌👏👏

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  12. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है https://rakeshkirachanay.blogspot.in/2018/04/63.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

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  13. वाह्ह्ह्ह श्वेताजी! बिलकुल सामयिक सन्दर्भ में धर्मान्धों के कलुषित अंतस को झकझोरती और दायित्व बोध की स्वर-सुधा से प्रक्षालित करती एक सार्थक, सटीक एवं उत्कृष्ट आवाहन गीत!!! बधाई!!!

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