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Sunday, 23 April 2017

जीवन व्यर्थ नहीं हो सकता

हर रात नींद की क्यारी में
बोते है चंद बीज ख्वाब के
कुछ फूल बनकर मुस्कुराते है
कुछ दफ्न होकर रह जाते है
बनते बिगड़ते ज़िदगी के राह में
चंद सपनों के टूट जाने से
जीवन व्यर्थ नहीं हो सकता।

आस निराश के पंखो़ में उड़कर
पंछी ढ़ूढ़े बसेरा पेड़़ो से जुड़कर
कभी मिलती है छाँव सुखों की
धूप तेज लगती है दुखो की
हर दिन साँझ के रूठ जाने से
भोर का सूरज व्यर्थ नहीं हो सकता।

रोना धोना, रूठना मनाना
लड़ना झगड़ना बचपन सा जीवन
जिद में अड़ा कभी उदास खड़ा
खोने का डर पाने की हसरत
कभी बेवजह ही मुस्कुराता चला
मासूम ख्वाहिशों को हाथों मे लिये
चंद खिलौने के फूट जाने से
बचपन तो व्यर्थ नहीं हो सकता।

कुछ भी व्यर्थ नहीं जीवन में
हर बात में अर्थ को पा लो
चंद साँसों की मोहलत मिली है,
चाहो तो हर खुशी तुम पा लो
आँखों पे उम्मीद के दीये जलाकर
हर तम पे विजय तुम पा लो
कुछ गम के मिल जाने से
अर्थ जीवन का व्यर्थ नहीं हो सकता।

       #श्वेता🍁