Wednesday, 29 May 2019

स्पीड ब्रेकर

सृष्टि से उत्पन्न
ब्रह्मांड के चर-अचर
समस्त जीव-निर्जीव
ग्रह-गोचर,नक्षत्र,उल्का,पिंड
जीवन,प्रकृति का सूक्ष्म से सूक्ष्म कण,
सभी अपनी निर्धारित
सीमाओं से बँधे
अपनी निश्चित परिधियों में 
घूमते
तट से वचनबद्ध
निरंतर अपने
कर्मपथ पर,
अपनी तय उम्र जीने को
विवश हैं
क्योंकि निर्धारित अनुशासन है
स्पीड ब्रेकर की तरह,
सीमाओं का उल्लंघन,
असमाऩ्य गतिशीलता,
असंतुलित बहाव
 और
धुरी से विलगता का परिणाम
भुगतना पड़ता है।
स्पीड ब्रेकर को अनदेखी
किये जाने की
लापरवाही से उपजी 
विनाशकारी
और जानलेवा हादसों की तरह।

#श्वेता सिन्हा

Monday, 27 May 2019

तुम हो तो...


तुम हो तो पल-पल तार अन्तर के
गीत मधुर गुनगुनाती है
प्रतिपल उठती,प्रतिपल गिरती
साँसें बुलबुल-सी
फुदक-फुदककर शोर मचाती है।

बिना छुए सपनों को मेरे
जीवित तुम कर जाते हो
निर्धूम सुलगते मन पर
चंदन का लेप लगाते हो
शून्य मन मंदिर में रूनझुन बातें
पाजेब की झंकार
रसीली रसधार-सी मदमाती है।

मन उद्विग्न न समझे कुछ
प्राणों के पाहुन ठहर तनिक
विरह पंक में खिलता महमह
श्वास सुवास कुमुदिनी मणिक
आस-अभिलाष की झलमल ज्योति
बाती-सी मुस्काती
उचक-उचककर चँदा को दुलराती है।

हिय सरिता की बूँद-बूँद
तुझमें विलय करूँ आत्मार्पण
तू ही ब्रह्म है तू ही सत्य बस
तुझको मन सर्वस्व समर्पण
जीवन की रिक्त दरारों में अमृत-सी
टप-टप,टिप-टिप 
संजीवनी मन की तृषा मिटाती है।

#श्वेता सिन्हा

ब्लॉग की सालगिरह.... चाँद की किरणें

सालभर बीत गये कैसे...पता ही नहीं चला। हाँ, आज ही के दिन १६फरवरी२०१७ को पहली बार ब्लॉग पर लिखना शुरु किये थे। कुछ पता नहीं था ब्लॉग के बा...

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