शनिवार, 20 जनवरी 2018

बसंत


भाँति-भाँति के फूल खिले हैं रंग-बिरंगी लगी फुलवारी।
लाल,गुलाबी,हरी-बसंती महकी बगिया गुल रतनारी।।

स्वर्ण मुकुट सुरभित वन उपवन रंगों की फूटे पिचकारी।
ओढ़़ के मुख पर पीली चुनरी इतराये सरसों की क्यारी।।

आम्र बौर महुआ की गंध से कोयलिया कूहके मतवारी।
मधुरस पीकर मधुकर झूमे मधुस्वर गुनगुन राग मनहारी।।

रश्मिपुंजों के मृदु चुंबन पर शरमायी कली पलक उघारी।
सरस सहज मनमुदित करे बाल-विहंगों की  किलकारी।।

ऋतुओं जैसे जीवन पथ पर सुख-दुख की है साझेदारी।
भूल के पतझड़ बांह पसारो अब बसंत की है तैय्यारी।।


बुधवार, 17 जनवरी 2018

बवाल



खुल के कह दी बात दिल की तो बवाल
लिख दिये जो ख़्वाब दिल के तो बवाल
इधर-उधर से ढ़ूँढते हो रोज़ क़िस्से इश्क़ के
हमने लफ़्ज़ों में बयां की मोहब्बत तो बवाल

देखकर आँखें झुका ली अदब से तो बवा
नज़रें मिलाई और हँस के चल दी तो बवाल
भावों से वो खेलते है फ़र्क़ क्या किसी दर्द का
हमने आईना दिखाया हो गया फिर तो बवाल

स्याही ख़ून में डुबोकर लिख दिया तो बवाल
कभी माटी कभी मौसम के रंग दिया तो बवाल
न ख़बर मैं क्या हूँ, वो कहे मेरे लिए अख़बार में
हमने चुप्पी साध ली हर बात पर तो है बवाल

ज़िंदगी की दौड़ में तुम रूको न चलो तो बवाल
मन मुताबिक पल जो चाहा न मिले तो बवाल
वो सजाये महफिलें और कहकहे हों बे-तुकें
हमने बस था मुस्कुराया एक जरा तो बवाल

      #श्वेता🍁

मैं से मोक्ष...बुद्ध

मैं  नित्य सुनती हूँ कराह वृद्धों और रोगियों की, निरंतर देखती हूँ अनगिनत जलती चिताएँ परंतु नहीं होता  मेरा हृदयपरिवर...