Sunday, 6 May 2018

कहानी अधूरी,अनुभूति पूरी -प्रेम की


उम्र के बोझिल पड़ाव पर
जीवन की बैलगाड़ी पर सवार
मंथर गति से हिलती देह
बैलों के गलेे से बंधा टुन-टुन की
 आवाज़ में लटपटाया हुआ मन
अनायास ही एक शाम
चाँदनी से भीगे 
गुलाबी कमल सरीखी
नाजुक पंखुड़ियों-सी चकई को देख
हिय की उठी हिलोर में डूब गया
कुंवारे हृदय के
प्रथम प्रेम की अनुभूति से बौराया
पीठ पर सनसनाता एहसास बाँधे
देर तक सिहरता रहा तन
मासूम हृदय की हर साँस में 
प्रेम रस के मदभरे प्याले की घूँट भरता रहा
मताया 
पलकें झुकाये भावों के समुंदर में बहती चकई
चकवा के पवित्र सुगंध से विह्वल  
विवश मर्यादा की बेड़ी पहने
अनकहे शब्दों की तरंगों से आलोड़ित 
मन के कोटर के कंपकंपाते बक्से के
भीतर ही भीतर
गूलर की कलियों-सी प्रस्फुटित प्रेम पुष्प
छुपाती रही 
तन के स्फुरण से अबोध
दो प्यासे मन का अलौकिक मिलन
आवारा बादलों की तरह
अठखेलियाँ करते निर्जन गगन में
संवेदनाओं के रथ पर आरुढ़
प्रेम की नयी ऋचाएँ गढ़ते रहे
स्वप्नों के तिलिस्म से भरा अनकहा प्रेम
यर्थाथ के खुरदरे धरातल को छूकर भी
विलग न हो सका
भावों को कचरकर देहरी के पाँव तले
लहुलुहान होकर भी
विरह की हूक दबाये
अविस्मरणीय क्षणों की 
टीसती अनुभूतियों को
अनसुलझे प्रश्नों के कैक्टस को अनदेखा कर
नियति मानकर श्रद्धा से
पूजा करेंंगे आजीवन
प्रेम की अधूरी कहानी की
पूर्ण अनुभूतियों को।


   -श्वेता सिन्हा

22 comments:

  1. तन के स्फुरण से अबोध
    दो प्यासे मन का अलौकिक मिलन
    आवारा बादलों की तरह
    अठखेलियाँ करते निर्जन गगन में
    संवेदनाओं के रथ पर आरुढ़
    प्रेम की नयी ऋचाएँ गढ़ते रहे.....लौकिक बिम्ब विधान की अद्भुत अलौकिक छटा!!! नैसर्गिक भाव प्रवाह से आप्लावित प्रेम छंद का अध्यात्मिक उल्लास!!! बधाई और आभार!!!!

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  2. अप्रतिम अद्भुत।

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    1. विलक्षण प्रेम संगीत, या अनुरागी चित की गति, सब कुछ समर्पित
      कितनी विहलता सब कुछ बस केन्द्रित एक ही धुरी पर,
      सुंदरतम रचना नजाकत से भरी मद्धरिम पूर्वईया सी सम्मोहित करती सी।
      बधाई श्वेता इस रस संगीत की।

      अनुपम अद्भुत अद्वितीय।।।

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  3. वाह!!अद्वितीय.... बहुत सुंदर लिठती हैं आप श्वेता ।

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  4. वाह!!!बहुत सुंदर👌👌👌

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  5. अद्भुत... अवर्णनीय भावाभिव्यक्ति एवं शब्द रोपण
    प्रथम पंक्ति ही पाठक को आकृष्ट करने के लिए ब्रह्मबाण है
    और आगे के क्या कहने
    .
    उम्र के बोझिल पड़ाव पर
    जीवन की बैलगाड़ी पर सवार
    मंथर गति से हिलती देह
    बैलों के गलेे से बंधा टुन-टुन की
    आवाज़ में लटपटाया हुआ मन
    अनायास ही एक शाम
    चाँदनी से भीगे
    गुलाबी कमल सरीखी
    नाजुक पंखुड़ियों-सी चकई को देख
    हिय की उठी हिलोर में डूब गया
    .
    .
    भावों को कचरकर देहरी के पाँव तले
    लहुलुहान होकर भी
    विरह की हूक दबाये
    अविस्मरणीय क्षणों की
    टीसती अनुभूतियों को
    अनसुलझे प्रश्नों के कैक्टस को अनदेखा कर
    नियति मानकर श्रद्धा से
    पूजा करेगे आजीवन
    प्रेम की अधूरी कहानी की
    पूर्ण अनुभूतियों को।
    .
    सराहनीय कृति आदरणीया... लाज़वाब������������
    ईश्वर आपकी लेखनी की यह धार सदा बरकरार रखें... अनेकों शुभकामनाएँ एक उत्कृष्ट रचना के लिए������
    .
    ""पूजा करेंगे आजीवन"" क्षमा कीजिएगा छोटे मुँह बड़ी बात, पर यहाँ "करेंगे" में शायद टंकण त्रुटि है और "करेगे" मुद्रित हो गया है। उम्मीद है अन्यथा नहीं लेंगीं। सादर🙏🙏🙏

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  6. बहुत सुंदर रचना..
    भाव और शब्द अतुल्य बधाई हो!

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  7. बहुत ही सुंदर रचना....

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  8. अप्रतिम पंक्तियाँ
    बहुत खूबसूरत रचना

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  9. प्रिय श्वेता -- रचना में गुंथी र्प्रेम कथा बेशक विस्मित करने वाली है !!!!!! साधारण कथा को आपके शब्दों के अलंकरण ने बहुत ही मोहक और सरस बना दिया है | सुकोमल शब्दावली और नाजुक से प्रेम की गाथा |ये एक सार्वभौम सत्य है कि जहाँ भी प्रेम ने अपूर्ण लेकिन मर्यादित रूप पाया है वहीँ उसका उत्कृष्टतम रूप उजागर हुआ है | कहानी अधूरी सही पर प्रेम अपने आप में पूर्ण होता है |सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई और शुभक्स्म्नाये आपको | सस्नेह --

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  10. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 9 मई 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  11. मनमोहक भावों से सम्पन्न‎ हृदयस्पर्शी सृजन .

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  12. बहुत सुन्दर रचना।.........
    मेरे ब्लाॅग पर आपका स्वागत है ।

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  13. यही जिन्दगी का फलसफा है ...

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  14. विरह की वेदना सुनाकर भी क्या फायदा
    अगर वेदना समझता ये जमाना तो विरह होता ??
    खैर उस अद्भुत प्रेम को
    उसकी सच्ची भावना के लिए सजदा खुद ब खुद हो जाता है।
    मैं इस कविता को दूसरी बार पढ़ रहा हूँ
    अबकी बार मायने बदल गए...
    ऐसी रचना जो जितनी बार पढ़ी जाएं उतनी बार मायनें अलग देती है कमाल की होती हैं ।

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  15. सुंदर कहानी।

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  16. बहुत खूबसूरत रचना श्वेता जी, मन को भावुक कर देती इस रचना पर क्या लिखूँ ? कई बार मौन ही शब्दों से बेहतर अभिव्यक्ति दे पाता है। मेरा स्नेह ।

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  17. This comment has been removed by the author.

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  18. प्रेम की कूँची से शाम का लाजवाब मंज़र खींच दिया और शब्दों से सजीव कर दिया ... लाजवाब रचना ...

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  19. वाह ! क्या बात है ! बहुत सुंदर प्रस्तुति ! बहुत खूब आदरणीया ।

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  20. Such a great line we are Online publisher India invite all author to publish book with us

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