Monday, 9 October 2017

उम्र की हथेलियों से


नज़्म

ख़्वाहिशों के बोझ से  
दबी ज़िदगी की
सीली मुट्ठियों में बंद 
तुड़े-मुड़े परों की 
सतरंगी तितलियाँ
अक्सर कुलबुलाती हैंं
दरारों से उंगलियों की 
उलझकर रह जाती हैं।


ढककर हथेलियों से
सूरज की फीकी कतरनें
ढलती शाम के स्याह अंधेरों में
च़राग लिये ढूँढ़ते हैं
बुझे तारे ख़्वाहिशों के
जलाकर जगमगाने को
बोझिल ख़्वाबों की राहदारी को।


उमर की हथेलियों से
फिसलते लम्हों की
चंद गिनती की साँसों पर
तुम्हारी छुअन के महकते निशां हैं
भीगी पलकों के चिलमन में
गुनगुनाती तस्वीर तेरी
कसमसाती धड़कनों की
गूँजती ख़ामोश सदाओं में
एहसास के शरारे से
तन्हाइयों की गलियाँ रोशन हैं।

       #श्वेता🍁


22 comments:

  1. ढककर हथेलियों से
    सूरज की फ़ीकी कतरनें.

    Wahhhhh। बहुत ही उम्दा

    ReplyDelete
    Replies
    1. अति आभार आपका अमित जी,तहेदिल से शुक्रिया खूब सारा।

      Delete
  2. महत्वाकांक्षाओं की दौड़-धूप के बीच ज़िन्दगी में सुकूं तलाश रही है आपकी अभिव्यक्ति।बिम्बों और प्रतीकों का सौन्दर्यमयी प्रयोग।
    कटीली झाड़ियों में उलझी ख़्वाबों की चादर आहिस्ते से ,क़रीने से ,संयम से सुलझानी होती है।
    उत्तम सृजन।
    बधाई एवं शुभकामनाऐं।

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपकी सुंदर और सुलझी हुई प्रतिक्रिया के लिए तहेदिल से शुक्रिया आपका खूब सारा रवींद्र जी।
      आपकी प्रेषित शुभकामनाएँ काम कर रही है,कृपया शुभकामनाओं का साथ बनाये रखे।

      Delete
  3. ......तन्हाईयों की गलियाँ रोशन है! बहुत उम्दा!

    ReplyDelete
    Replies
    1. अति आभारा आपका विश्वमोहन जी,आपकी बेशकीमती सराहना मिली मन उत्साहित हुआ।
      हृदयतल से आभार आपका।

      Delete
  4. भीगी पलकों के चिलमन में
    गुनगुनाती तस्वीर तेरी
    कसमसाती धड़कनों की
    गूँजती ख़ामोश सदाओं में
    वाह!!!
    लाजवाब.....

    ReplyDelete
    Replies
    1. अति आभार आपका सुधा जी।मेरा मनोबल आप सदैव बढ़ा जाती है हृदयतल से अति आभार आपका सस्नेह।

      Delete
  5. वाहःह बेहतरीन रचना
    बहुत खूब

    ReplyDelete
    Replies
    1. अति आभार आपका लोकेश जी,हृदयतल से शुक्रिया खूब सारा।

      Delete
  6. बेहतरीन भावों‎ को संजोये लाजवाब रचना‎ .

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत आभार आपका मीना जी।तहेदिल से शुक्रिया खूब सारा।

      Delete
  7. उमर की हथेलियों से
    फिसलते लम्हों की
    चंद गिनती की साँसों पर
    तुम्हारी छुअन के महकते निशां हैं...
    बहुत बढ़िया, स्वेता!

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार ज्योति जी आप सदैव मेरी रचनाओं को सराहती है बहुत उत्साहवर्धन होता है।
      तहेदिल से शुक्रिया आपका खूब सारा।सस्नेह।

      Delete
  8. Replies
    1. अति आभार आपका राजीव जी।

      Delete
  9. सुन्दर ! काबिलेतारीफ़ ,
    सादर

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी अति आभार आपका तहेदिल से शुक्रिया।
      सादर।

      Delete
  10. अत्यंत सुंदर रचना ! एक ही रचना में जाने कितने ही चित्र खींच दिए आपने ! बधाई ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका मीना जी।सस्नेह शुक्रिया खूब सारा।

      Delete
  11. बहुत प्रभावशाली रचना सुंदर दिल को छूते शब्द ...मनभावन

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार शुक्रिया आपका संजय जी।आपकी प्रतिक्रिया सदैल मनोबल बढ़ा जाती है।

      Delete

ब्लॉग की सालगिरह.... चाँद की किरणें

सालभर बीत गये कैसे...पता ही नहीं चला। हाँ, आज ही के दिन १६फरवरी२०१७ को पहली बार ब्लॉग पर लिखना शुरु किये थे। कुछ पता नहीं था ब्लॉग के बा...

आपकी पसंद