Wednesday, 1 November 2017

मुस्कान की कनी

लबों पे अटकी
मुस्कान की कनी
दिल में गड़ गयी
लफ्ज़ों की अनी

बातों की उंगलियों से
जा लिपटा मन
उलझकर रह गयी
छुअन में वहीं

अनगिनत किस्से है
कहने और सुनने को
लाज के मौन में सिमटी
कई बातें अनगिनी

सुनो,
रोज आया करो न
आँगन में मेरे 
जाया करो बरसाकर
बातों की चाँदनी

क्या फर्क है कि
तुम दूर हो या पास
एहसास तुम्हारा
भर देता है रोशनी

     #श्वेता🍁

40 comments:

  1. नमस्ते, आपकी यह प्रस्तुति "पाँच लिंकों का आनंद" ( http://halchalwith5links.blogspot.in ) में गुरूवार 02-11-2017 को प्रातः 4:00 बजे प्रकाशनार्थ 839 वें अंक में सम्मिलित की गयी है।
    चर्चा में शामिल होने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं, आइयेगा ज़रूर। सधन्यवाद।

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    1. बहुत बहुत आभार आपका रवींद्र जी,तहेदिल से शुक्रिया खूब सारा।

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  2. आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा 02-11-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2776 में की जाएगी |
    धन्यवाद

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    1. जी बहुत बहुत आभार तहेदिल से शुक्रिया आपका आदरणीय।

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  3. बेहद खूबसूरत . कमाल की "मुस्कान" श्वेता जी .बहुत ही उम्दा .

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    1. जी बहुत बहुत आभार आपका मीना जी,तहेदिल से शुक्रिया जी।

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  4. भावों की चांदनी में दमकती मुस्कान की कनी सचमुच कमाल की है | बहुत ही सुकोमल भावनाओं की महकती माला सी !!!!!!!!!!!!! बहुत शुभकामना प्रिय श्वेता जी |

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    1. बहुत बहुत आभार प्रिय रेणु जी,तहेदिल से शुक्रिया खूब सारा जी।

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  5. बहुत सुंदर
    मन को छूती हुई रचना

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    1. बहुत बहुत आभार.आपका लोकेश जी तहेदिल से शुक्रिया जी।

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  6. वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर हृदयस्पर्शी रचना....

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    1. बहुत बहुत आभार सुधा जी तहेदिल से शुक्रिया आपका।

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  7. Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका विश्वमोहन जी।तहेदिल से शुक्रिया आपका।

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  8. Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका ध्रुव जी।शुक्रिया बहुत सारा।

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  9. क्या फर्क है कि
    तुम दूर हो या पास
    एहसास तुम्हारा
    भर देता है रोशनी...हृदयस्पर्शी रचना

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    1. बहुत बहुत आभार आपका वंदना जी।तहेदिल से शुक्रिया जी।

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  10. Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका सर।

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  11. क्या फर्क है कि
    तुम दूर हो या पास
    एहसास तुम्हारा
    भर देता है रोशनी...
    बहुत खुब स्वेता!

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    1. बहुत बहुत आभार आपका ज्योति, तहेदिल से शुक्रिया आपका खूब सारा।

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  12. सुनो,
    रोज आया करो न
    आँगन में मेरे
    जाया करो बरसाकर
    बातों की चाँदनी..

    काव्य के अलग अलग जायके की क्षुधा हो तो आपके ब्लॉग का नियमित पाठक बनना एक बेहतर निर्णय साबित होगा। लुत्फ़ से भरपूर रचना। wahhhh

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    1. अमित जी,
      आपकी सराहना भरे शब्द मन को ऊर्जा से भर देते है। आपने सदैव बहुत मनोबल बढ़ाया है मेरा जितना भी आभार कह ले कम होगा।आपका बहुत बहुत आभार तहेदिल से शुक्रिया खूब सारा।

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  13. बहुत सुंदर |

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    1. बहुत बहुत आभार अर्चना जी,तहेदिल से शुक्रिया आपका।

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  14. अरे वाह !बहुत ही अच्छा लिखा है आपने .... बधाई

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    1. बहुत बहुत आभार सदा जी आपको अच्छा लगा हम खुश हो गये।
      तहेदिल से शुक्रिया जी आपका।

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  15. वाह...दिल को छूती बहुत सुन्दर रचना...

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    1. बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय, तहेदिल से शुक्रिया आपका।

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  16. Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय, तहेदिल से शुक्रिया।

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  17. Replies
    1. जी रश्मि जी,आपको अपने ब्लॉग पर देखकर हम बहुत खुश है। आपका नेह मिलना पुरस्कार है मेरे लिए। तहेदिल से शुक्रिया आपका बहुत बहुत आभार।

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  18. नित नये कोमल भाव, कितने प्यारे कितने सलोने...हर रचना में प्रेम के नायाब रंग.
    आप की रचनाशीलता को नमन.
    सादर

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    1. बहुत बहुत आभार आपका अपर्णा जी,तहेदिल से शुक्रिया आपका।

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  19. लाजवाब ! लाजवाब !! और लाजवाब !!

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    1. बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय सर,तहेदिल से शुक्रिया आपका बहुत सारा।

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