Monday, 30 October 2017

शरद का स्वागत


पहाड़ों
का मौसम
फ़िज़ांओं में 
उतर आया है।
चाँदनी ने 
सारी रात 
खूब नेह 
बरसाया है।

ओस में भीगी 
फूल और पत्ते 
ताजगी 
जगाने लगी,
करवट 
ले रहा
मौसम
हवाओं ने 
एहसास 
कराया है।

नीले नीले 
आसमां में
रूई से 
बादल 
उड़ने लगे,
गुनगुनी 
धूप की 
बारिश ने, 
रुत को 
रंगीन 
बनाया है।

भँवर 
और तितली
फूलों से
बतियाने लगे,
गुलाब की 
खुशबू ने 
बाग का 
हर कोना 
महकाया है।

शरद के 
स्वागत में 
वादियों के 
दामन 
सजने लगे,
बहकी
हवाओं ने 
हर शय में
नया राग 
जगाया है।

       #श्वेता🍁

41 comments:

  1. Sweta Ji, Great expression of feeling

    ReplyDelete
  2. शरद का आगमन ,बदलता मौसम ......
    बहुत ही सुन्दर रचना...
    भँवर
    और तितली
    फूलों से
    बतियाने लगे,
    वाह!!!
    लाजवाब...

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार सुधा जी,तहेदिल से शुक्रिया आपका खूब सारा।

      Delete
  3. वादियाँ तो तैयार हैं स्वागत के लिए ... गुनगुनी धुप हो चली है अब ...
    बहुत खूब है रचना ...

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार नासवा जी आपका। काफी दिनों बाद आपकी प्रतिक्रिया मिली बहुत अच्छा लगा।

      Delete
  4. खूबसूरत मौसम !!!!

    ReplyDelete
    Replies
    1. हाँ मीना जी बहुत खूबसूरत मौसम।आभार जी आपका बहुत सारा।

      Delete
  5. शरद के
    स्वागत में
    वादियों के
    दामन
    सजने लगे,
    बहकी
    हवाओं ने
    हर शय में
    नया राग
    जगाया है।.... बहुत सुन्दर -वंदना बाजपेयी

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका वंदना जी। तहेदिल से
      शुक्रिया आपका।

      Delete
  6. बहुत उम्दा रचना श्वेता जी

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका लोकेश जी,तहेदिल से शुक्रिया खूब सारा।

      Delete
  7. स्वेता,शरद के मौसम का बहुत ही खूबसूरत वर्णन किया हैं तुमने। बहुत बढ़िया।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका ज्योति जी,शरद इतना प्यारा है कि शब्दों में वर्णन हो ही पाता।

      Delete
  8. जाइए...
    मैं नहीं व्यक्त करती
    अपनी प्रतिक्रिया..
    निगोड़ा शरद...
    आया भी देर से
    जाएगा भी जल्दी
    ज़ियादा दिन तक
    गरम चाय और
    मूंगबड़े का आनन्द
    नहीं न ले पाएँगे
    सादर

    ReplyDelete
    Replies
    1. मेरी प्यारी दी की सबसे न्यारी प्रतिक्रिया😊
      बहुत आभार दी,तहेदिल से शुक्रिया आपका खूब सारा।
      जाने दीजिए जल्दी जितने भी दिन है आनंद लेते है न।

      Delete
  9. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 31 अक्टूबर 2017 को साझा की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार दी तहेदिल से शुक्रिया आपका।

      Delete
  10. पहाड़ों
    का मौसम
    फ़िज़ांओं में
    उतर आया है।

    Wahhhhhh। बहुत सुंदर। ख़ूबसूरत रचना

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका तहेदिल से शुक्रिया खूब सारा अमित जी।

      Delete
  11. ठंडक की बात ही कुछ‎ और है . इस पर स्वागत में आपकी रचना.बहुत खूब श्वेता जी .

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी आभार आपका मीना जी बहुत सारा,तहेदिल से शुक्रिया जी।

      Delete
  12. Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका सर,तहेदिल से शुक्रिया।

      Delete
  13. Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका ध्रुव जी।शुक्रिया तहेदिल से।

      Delete
  14. वाह !!बहुत खूबसूरत शब्दों से सजाई रचना
    हम़े बहुत ही पसंद आई रचना।

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी शुभा जी,आपको रचना पसंद आयी हमें बहुत खुशी हुई।आभार बहुत सारा तहेदिल से।

      Delete
  15. शरद का स्वागत बहुत खूब -- प्रिय श्वेता बहन | बहुत आँखें पकाई इसके इन्तजार ने |

    ReplyDelete
    Replies
    1. प्रिय रेणु जी जी सालभर का इंतज़ार के बाद ही मिलती है ठंडी बयार।
      बहुत बहुत आभार आपका शुक्रिया तहेदिल से जी।

      Delete
  16. बहुत ही प्यारी रचना ....

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत आभार सदा जी।तहेदिल से शुक्रिया आपका।

      Delete
  17. वाह ! खूबसूरत रचना ! बहुत खूब आदरणीया ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका सर,काफी दिनों बाद आपका आशीष मिला मन प्रसन्न हुआ।तहेदिल से शुक्रिया आपका।

      Delete
  18. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है https://rakeshkirachanay.blogspot.in/2017/11/42.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  19. बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  20. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" शुक्रवार 11 सितम्बर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  21. बहुत सुंदर रचना

    ReplyDelete
  22. प्रियश्वेता, एक बार फिर से पढ़कर आनंद aa गया ये रचना पढ़कर। अत्यंत मनोहारी दृश्य सजाती रचना। शुभकामना और प्यार ❤❤🌹🌹

    ReplyDelete
  23. आदरणीया मैम,
    बहुत ही प्यारी रचना शरद ऋतु के स्वागत में।प्रकृति का अति सुंदर मर्म रूप जो मन को आनंद से भर देता है। शरद ऋतु की एक शांत सुनहरी सुबह की छवि मन को निश्चिन्त और सुखद अनुभूति देती है।
    आज आपकी रचनाओं से सजी हुई प्रस्तुति पढ़ कर बहुत आनंद आया।
    आशा है कि आप जल्दी ही अपनी नई रचनाओं के साथ लौटें।
    आपको सादर नमन।

    ReplyDelete

आपकी लिखी प्रतिक्रियाएँ मेरी लेखनी की ऊर्जा है।

शुक्रिया।

मैं से मोक्ष...बुद्ध

मैं  नित्य सुनती हूँ कराह वृद्धों और रोगियों की, निरंतर देखती हूँ अनगिनत जलती चिताएँ परंतु नहीं होता  मेरा हृदयपरिवर...