Monday, 30 October 2017

शरद का स्वागत


पहाड़ों
का मौसम
फ़िज़ांओं में 
उतर आया है।
चाँदनी ने 
सारी रात 
खूब नेह 
बरसाया है।

ओस में भीगी 
फूल और पत्ते 
ताजगी 
जगाने लगी,
करवट 
ले रहा
मौसम
हवाओं ने 
एहसास 
कराया है।

नीले नीले 
आसमां में
रूई से 
बादल 
उड़ने लगे,
गुनगुनी 
धूप की 
बारिश ने, 
रुत को 
रंगीन 
बनाया है।

भँवर 
और तितली
फूलों से
बतियाने लगे,
गुलाब की 
खुशबू ने 
बाग का 
हर कोना 
महकाया है।

शरद के 
स्वागत में 
वादियों के 
दामन 
सजने लगे,
बहकी
हवाओं ने 
हर शय में
नया राग 
जगाया है।

       #श्वेता🍁

36 comments:

  1. Sweta Ji, Great expression of feeling

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  2. शरद का आगमन ,बदलता मौसम ......
    बहुत ही सुन्दर रचना...
    भँवर
    और तितली
    फूलों से
    बतियाने लगे,
    वाह!!!
    लाजवाब...

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    1. बहुत बहुत आभार सुधा जी,तहेदिल से शुक्रिया आपका खूब सारा।

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  3. वादियाँ तो तैयार हैं स्वागत के लिए ... गुनगुनी धुप हो चली है अब ...
    बहुत खूब है रचना ...

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    1. बहुत बहुत आभार नासवा जी आपका। काफी दिनों बाद आपकी प्रतिक्रिया मिली बहुत अच्छा लगा।

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  4. खूबसूरत मौसम !!!!

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    1. हाँ मीना जी बहुत खूबसूरत मौसम।आभार जी आपका बहुत सारा।

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  5. शरद के
    स्वागत में
    वादियों के
    दामन
    सजने लगे,
    बहकी
    हवाओं ने
    हर शय में
    नया राग
    जगाया है।.... बहुत सुन्दर -वंदना बाजपेयी

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    1. बहुत बहुत आभार आपका वंदना जी। तहेदिल से
      शुक्रिया आपका।

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  6. बहुत उम्दा रचना श्वेता जी

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    1. बहुत बहुत आभार आपका लोकेश जी,तहेदिल से शुक्रिया खूब सारा।

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  7. स्वेता,शरद के मौसम का बहुत ही खूबसूरत वर्णन किया हैं तुमने। बहुत बढ़िया।

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    1. बहुत बहुत आभार आपका ज्योति जी,शरद इतना प्यारा है कि शब्दों में वर्णन हो ही पाता।

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  8. जाइए...
    मैं नहीं व्यक्त करती
    अपनी प्रतिक्रिया..
    निगोड़ा शरद...
    आया भी देर से
    जाएगा भी जल्दी
    ज़ियादा दिन तक
    गरम चाय और
    मूंगबड़े का आनन्द
    नहीं न ले पाएँगे
    सादर

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    1. मेरी प्यारी दी की सबसे न्यारी प्रतिक्रिया😊
      बहुत आभार दी,तहेदिल से शुक्रिया आपका खूब सारा।
      जाने दीजिए जल्दी जितने भी दिन है आनंद लेते है न।

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  9. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 31 अक्टूबर 2017 को साझा की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    Replies
    1. बहुत बहुत आभार दी तहेदिल से शुक्रिया आपका।

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  10. पहाड़ों
    का मौसम
    फ़िज़ांओं में
    उतर आया है।

    Wahhhhhh। बहुत सुंदर। ख़ूबसूरत रचना

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    Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका तहेदिल से शुक्रिया खूब सारा अमित जी।

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  11. ठंडक की बात ही कुछ‎ और है . इस पर स्वागत में आपकी रचना.बहुत खूब श्वेता जी .

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    Replies
    1. जी आभार आपका मीना जी बहुत सारा,तहेदिल से शुक्रिया जी।

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  12. Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका सर,तहेदिल से शुक्रिया।

      Delete
  13. Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका ध्रुव जी।शुक्रिया तहेदिल से।

      Delete
  14. वाह !!बहुत खूबसूरत शब्दों से सजाई रचना
    हम़े बहुत ही पसंद आई रचना।

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    Replies
    1. जी शुभा जी,आपको रचना पसंद आयी हमें बहुत खुशी हुई।आभार बहुत सारा तहेदिल से।

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  15. शरद का स्वागत बहुत खूब -- प्रिय श्वेता बहन | बहुत आँखें पकाई इसके इन्तजार ने |

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    1. प्रिय रेणु जी जी सालभर का इंतज़ार के बाद ही मिलती है ठंडी बयार।
      बहुत बहुत आभार आपका शुक्रिया तहेदिल से जी।

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  16. बहुत ही प्यारी रचना ....

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    1. बहुत आभार सदा जी।तहेदिल से शुक्रिया आपका।

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  17. वाह ! खूबसूरत रचना ! बहुत खूब आदरणीया ।

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    Replies
    1. बहुत बहुत आभार आपका सर,काफी दिनों बाद आपका आशीष मिला मन प्रसन्न हुआ।तहेदिल से शुक्रिया आपका।

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  18. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है https://rakeshkirachanay.blogspot.in/2017/11/42.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

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  19. बहुत सुन्दर

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