Friday, 3 November 2017

मन की नमी

दूब के कोरों पर,
जमी बूँदें शबनमी।
सुनहरी धूप ने,
चख ली सारी नमी।
कतरा-कतरा
पीकर मद भरी बूँदें,
संग किरणों के, 
मचाये पुरवा सनसनी।
सर्द हवाओं की
छुअन से पत्ते मुस्काये,
चिड़ियों की हँसी से,
कलियाँ हैं खिलीं,
गुलों के रुख़सारों पर 
इंद्रधनुष उतरा,
महक से बौरायी, 
हुईं तितलियाँ मनचली।
अंजुरीभर धूप तोड़कर 
बोतलों में बंद कर लूँ,
सुखानी है सीले-सीले,
मन की सारी नमी।



       #श्वेता🍁

26 comments:

  1. शबनमी सा एहसास कराती रचना
    बहुत खूब

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    1. बहुत बहुत आभार लोकेश जी आपकी सुंदर प्रतिक्रिया के लिए,तहेदिल से शुक्रिया खूब सारा।

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  2. प्रकृति की अनुपम छटा उकेरती आपकी रचना...
    वाह!!!
    लाजवाब...

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    1. बहुत बहुत आभार आपका सुधा जी,तहेदिल से शुक्रिया जी आप सदैव सराहती है उत्साह बढ़ाती है मेरा नेह बनाये रखे।

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  3. वाह ! क्या बात है ! लाजवाब प्रस्तुति ! प्राकृतिक सौंदर्य बोध गजब का है आप का ! प्रकृति की सुकुमार कवियत्री को मेरा नमन ।

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    1. बहुत बहुत आभार आपका सर आपने बहुत मान दिया इतने सुंदर शब्द कहकर मन अभिभूत है आपके आशीर्वचनों से।तहेदिल से शुक्रिया खूब सारा आपका अपना आशीष बनाये रखे सर।

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    1. बहुत बहुत आभार आपका सर,तहेदिल से शुक्रिया।

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  5. भावों को सुंदर शब्दों में पिरोया है, बहुत ख़ूब

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    1. बहुत बहुत आभार आपका श्याम जी तहेदिल से शुक्रिया आपका।

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  6. बहुत ख़ूब !
    शीत ऋतु का मनोहारी चित्र उकेर दिया है श्वेता जी आपने।
    आपकी क़लमकारी के नए रंग प्रकृति की मोहक छटा बिखेर रहे हैं।
    इतना सूक्ष्म अवलोकन प्राकृतिक घटनाओं का कि वाचक को लगता है पढ़कर जैसे लिखा हुआ सब सामने चित्र बनकर उभर आया हो।
    आपकी कल्पनाशक्ति और लेखनी को माँ सरस्वती का आशीर्वाद सतत मिलता रहे।
    बधाई एवं शुभकामनाऐं।

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    1. आदरणीय रवींद्र जी,
      आपकी सराहना और मनोबल बढ़ाते शब्द सदैव संजीवनी जैसे होते है रचनाकारों के लिए।आपकी सुंदर शुभकामनाएँ मन को सदा आहृलादित करती है।कृपया अपना आशीष बनाये रखें।
      बहुत बहुत आभार शुक्रिया आपका तहेदिल से खूब सारा।

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  7. बहुत खूबसूरत रचना‎ श्वेता जी .

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    1. बहुत बहुत आभार आपका मीना जी,तहेदिल से शुक्रिया खूब सारा आपका।

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  8. वाह कोई जवाब नहीं सीधे दिल पर दस्तक दी है

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    1. बहुत बहुत आभार आपका संजय जी,तहेदिल से शुक्रिया आपका।

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  9. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 05 नवम्बर 2017 को साझा की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. बहुत बहुत आभार आपका दी,तहेदिल से शुक्रिया आपका।

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  10. वाह बहुत ही सुंदर शब्द रचना ।

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    1. बहुत बहुत आभार आपका तहेदिल से शुक्रिया बहुत सारा सदा जी।

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  11. अंजुरीभर धूप तोड़कर
    बोतलों में बंद कर लूँ..

    ऐसी तिलिस्मी कल्पनायें, ऐसे तब्सिरे गुलज़ार साहब के बाद सिर्फ आप को लिखते देखा है। बखूबी देखा है। बहुत बहुत कमाल रचना। wahhh

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  12. शबनम की नमी और मन की नमी .... दोनों को अगर कोई सोख ले तो दिल आनंदित हो जाता है ...
    विस्तृत विचार प्रवाह ...

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  13. बहुत सुंदर ढ़ेरों शुभकामनाएँ

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आपकी लिखी प्रतिक्रियाएँ मेरी लेखनी की ऊर्जा है।

शुक्रिया।

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