Wednesday, 15 July 2020

नैतिकता


उज्जवल चरित्र उदाहरणार्थ
जिन्हें लगाया गया था
सजावटी पुतलों की भाँति
पारदर्शी दीवारों के भीतर
लोगों के संपर्क से दूर
प्रदर्शनी में
पुरखों की बेशकीमती धरोहर की तरह,
ताकि ,विश्वास और श्रद्धा से नत रहे शीश,
किंतु सत्य की आँच से
दरके भारी शीशों से
बड़े-बड़े बुलबुले स्वार्थपरता के
ईमान के लचीलेपन पर 
अट्टहास कर
कर्म की दुर्बलता का
प्रमाण देने लगे।

असंतोष और विरोध,
प्रश्नों के बौछारों से
बौखलाकर,
आँखों से दूर सँकरे कोने में 
स्थानांतरित कर दी गयी 
चौराहे पर लगी
शिकायत पेटी
और...
एक हवन कुंड बना दिया गया
लोककल्याणकारी 
पवित्र यज्ञ का हवाला देकर
आह्वान कर 
सुखद स्वप्नों के
कुछ तर्कशील मंत्र पढ़े गये
किंतु
नवीन कुछ नहीं था
समिधाएँ बनी एक बार फिर
नैतिकता।

चुपचाप रहकर
अपने मंतव्यों के पतंग
कल्पनाओं के आसमान में ही
उड़ाना सुरक्षित है,
मनोनुकूल परिस्थितियाँ
बताने वाली
समयानुकूल घड़ियाँ
प्रचलन में हैं आजकल
चुप्पियों की मुर्दा कलाईयों में
बँधी सूईयों की टिक-टिक
ईनाम है 
निर्वासित आत्मा की 
समझदार देह के लिए।

#श्वेता सिन्हा
१५ जुलाई२०२०


12 comments:

  1. सत्य नहीं,
    समय की आँच पर पकी होती हैं
    धरोहरें पूर्वजों की!
    तभी तो, सजाया जाता है सादर
    नरमुण्ड निर्जीव-सा
    तथागत का, घरों में।
    और बेचती हैं
    आकृतियाँ सजीव-सी
    अपनी चहलकदमियों को
    रैम्प पर!!!
    और यही सत्य है,
    सजावटी पुतलों का!!!
    व्यवहार के स्तर पर वैचारिक आडंबर की अर्वाचीन परत को खोलती कविता!!! आभार और बधाई!!!!

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज गुरुवार 16 जुलाई 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. बहुत खूब श्वेता जी ! सच कहा आपने ।

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  4. आदरणीया मैम,
    अत्यंत सुंदर और सटीक कविता। आप जब भी सामाजिक कविताएं लिखतीं हैं तो अंतरात्मा को झकझोर देतीं हैं। इतनी सुंदर रचना के लिए धन्यवाद। अपना स्नेह बनाये रखियेगा।

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  5. सटीक और समसामयिक कविता

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  6. नैतिकता की खंडित आस्थाओं को उकेरती सार्थक रचना प्रिय श्वेता। हार्दिक शुभकामनायें 🌹🌹💐💐🌹🌹

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  7. बहुत सुन्दर

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  8. "...
    मनोनुकूल परिस्थितियाँ
    बताने वाली
    समयानुकूल घड़ियाँ
    प्रचलन में हैं आजकल
    ..."

    वाकई बहुत ही बढ़िया रचना। कटु सत्य।

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आपकी लिखी प्रतिक्रियाएँ मेरी लेखनी की ऊर्जा है।

शुक्रिया।

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