बुधवार, 12 अक्तूबर 2022

मौन शरद की बातें


 साँझ के बाग में खिलने लगीं
काली गुलाब-सी रातें।
चाँदनी के वरक़ में लिपटी
 मौन शरद की बातें।

 चाँद का रंग छूटा
चढ़ी स्वप्नों पर कलई,
हवाओं की छुअन से 
सिहरी शिउली की डलई,
सप्तपर्णी के गुच्छों पर झुके
बेसुध तारों की पाँतें।
साँझ के बाग में खिलने लगीं
काली गुलाब-सी रातें।

झुंड श्वेत बादलों के 
निकले सैर पर उमगते,
इंद्रधनुषी स्वप्न रातभर
क्यारी में नींद की फुनगते,
पहाडों से उतरकर हवाएँ
करने लगी गुलाबी मुलाकातें।
साँझ के बाग में खिलने लगीं
काली गुलाब-सी रातें।

शरद है वैभव विलास
ज़रदोज़ी सौंदर्य का,
सुगंधित शीतल मंद बयार
रस,आनंद माधुर्य-सा,
प्रकृति करती न्योछावर
अंजुरी भर-भर सौगातें।
साँझ के बाग में खिलने लगीं
काली गुलाब-सी रातें।
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-श्वेता सिन्हा
१२ अक्टूबर २०२२

16 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है प्रिय श्वेता! चाँदनी रात के सौंदर्य को कोई भी शब्दों में सहजता से उतार ले पर सघन श्यामवर्णी रात्रि को लिखना सरल नहीं।इसकी सुन्दरता को देखने के लिए सूक्ष्म दृष्टि का होना अनिवार्य।शरद के आगमन का ये सुन्दर शब्दचित्र में रात्रि का अभिराम दृश्य सजा है! ये मौसम अपने साथ अनेक उपहार लेकर आता है।चन्द्र विहीन रात्रि का अपना सुकून है।बहुत दिनों बाद तुम्हारी भावपूर्ण रचना पढ़कर बहुत अच्छा लगा। अपने लेखन को पुन गति दो।अपनी कल्पना और अभिव्यक्ति के द्वार बंद मत करो।हार्दिक स्नेह और शुभकामनाएं प्।

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    1. प्रिय दी,
      आपकी इस त्वरित सराहना से भरी प्रतिक्रिया के लिए कैसे आभार कहूँ समझ नहीं आ रहा।
      इतनी सरल अभिव्यक्ति पर आपकी इतनी सुंदर प्रतिक्रिया से अभिभूत हूँ।
      अपना स्नेह बनाये रखिये दी।
      सादर स्नेह।

      हटाएं
  2. झुंड श्वेत बादलों के
    निकले सैर पर उमगते,
    इंद्रधनुषी स्वप्न रातभर
    क्यारी में नींद की फुनगते,
    पहाडों से उतरकर हवाएँ
    करने लगी गुलाबी मुलाकातें।
    साँझ के बाग में खिलने लगीं
    काली गुलाब-सी रातें।///
    👌👌👌👌♥️🌹🌹♥️

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  3. प्रकृति को पहचाना जाता है उसके रूप से,उसके मौलिक सौंदर्य से और उसकी सुगंध भरी हवाओं से लेकिन इस प्रकृति में अमावस और पूनम का भी अपना महत्व होता है साथ ही शरद का चांद प्रकृति की छटा को और भी सुंदरता से बिखेर देता है.

    यह नवगीत प्रकृति की खूबसूरती का चित्रण है
    कमाल के बिम्ब और प्रतीक

    अद्भुत नवगीत सृजन के लिए
    हार्दिक बधाई

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  4. शरद का मनोहारी वर्णन । काला गुलाब यूँ कम ही देखने को मिलता है उससे बिम्ब ले कर रात का खूबसूरत चित्रण किया है । सुंदर सृजन जिसे जितनी बार भी पढ़ो कम है ।

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  5. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 13.10.22 को चर्चा मंच पर चर्चा - 4580 में दी जाएगी
    धन्यवाद
    दिलबाग

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  6. वाह! प्रकृति के सौंदर्य का इतना सजीव वर्णन!!

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  7. "साँझ के बाग में खिलने लगीं
    काली गुलाब-सी रातें।"

    अहा!! सौंदर्य बोध छायावाद सा सुंदर अभिनव ,अभिराम श्वेता मंत्रमुग्ध करता काव्य आपकी लेखनी से चांदनी के वैभव सा अलंकृत होकर सरस गति से बह निकला है।
    अद्भुत निशब्द।

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  8. स्वेता दी, काली रातों का भी कोई इतना सुंदर वर्णन कर सकता है? ये आपकी कलाम का ही जादू है। बहुत सुंदर रचना दी।

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  9. साँझ के बाग में खिलने लगीं
    काली गुलाब-सी रातें।
    चाँदनी के वरक़ में लिपटी
    मौन शरद की बातें।
    काले गुलाब सी दुर्लभ भावाभिव्यक्ति.., मनमोहक !! उत्कृष्ट सृजनात्मकता ।

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  10. सुन्दर रचना । दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ l

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  11. चाँद का रंग छूटा
    चढ़ी स्वप्नों पर कलई,
    हवाओं की छुअन से
    सिहरी शिउली की डलई,
    सप्तपर्णी के गुच्छों पर झुके
    बेसुध तारों की पाँतें।
    साँझ के बाग में खिलने लगीं
    काली गुलाब-सी रातें।
    बहुत ही अद्भुत काली गुलाब सी रातें !
    वाह!!!
    सुंदर बिम्ब मनमोहक शब्दसौष्ठव
    लाजवाब।

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  12. डॉ विभा नायक10:23 pm, नवंबर 24, 2022

    वाह कितनी मादक और मोहक अभिव्यक्ति🌹🌹

    जवाब देंहटाएं

आपकी लिखी प्रतिक्रियाएँ मेरी लेखनी की ऊर्जा है।
शुक्रिया।

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