Tuesday, 30 January 2018

इंद्रधनुष



मौन की चादर डाले
नीले आसमान पर
छींटदार श्वेत बादलों की 
छाँव में
बाँह पसारे हवाओं के संग
बहते परिंदे मानो
वक़्त के समुन्दर में 
निर्विकार उमड़ते ज्वार
से किनारे पर बिखरे 
मोतियों को सहलाते हैं
अक्सर झरोखे के पीछे से
मंत्रमुग्ध नभ में विलीन
स्वप्निल आँखों के कैनवास पर
अनजाने स्पर्श से
जीवित होने लगती हैं 
निर्जीव पड़ी तस्वीरें
लंबे देवदार के वृक्षों की कतारों के
ढलान पर लाल बजरी की पगडंडियों से
झील तक पहुँचते रास्ते पर
जंगली पीले फूलों को चूमते
रस पीते भँवरे गुनगुनाने लगते हैं
चौकोर काले चट्टान पर बैठी मैं
घुटनों पर ठोढ़ी टिकाये
हथेलियों से गालों को थामे
हवाएँ रह-रह कर 
बादामी ज़ुल्फ़ों से खेलती है
तब धड़कनों को चुपचाप सुनती
मदहोश ख़्याल में गुम
दूर तक फैले गहरे हरे पानी के ग़लीचे पर
देवदार के पत्तों से छनकर आती
धुंधली सूरज की मख़मली किरणें
जो झीेल के आईने में गिरते ही
बदल जाती है 
इंद्रधनुषी रंगों में
और पानी से खेलती हथेलियों पर
पसर जाती है बाँधनी चुनर सी
उन चटकीले रंगों को 
मल कर मन के बेजान पन्नों पर
उकेरती हूँ 
शब्दों की तूलिका से 
कविताओं के इंद्रधनुष।


      #श्वेता सिन्हा

18 comments:

  1. चुन चुनकर अछूते विशेषणों को शब्दों से बाँधकर एक चित्र सा खींच देती हैं आप ! आपके इस फन की मैं कायल हूँ । बहुत खूबसूरत शब्दचित्र !

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  2. उन चटकीले रंगों को
    मल कर मन के बेजान पन्नों पर
    उकेरती हूँ
    शब्दों की तूलिका से
    कविताओं के इंद्रधनुष।
    वाह ! वाकई चटकीले रंग है, इंद्रधनुषी से!!! बधाई!!!

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  3. आप जब भी खाली कैनवस में अपने भावों की अभिव्यक्ति शब्दों के कुचे से भर्ती हे...एक बड़ा ही मनमोहक दृश्य आंखों के समक्ष उपस्थित होने लगता है..और मन स्वत: ही आपकी द्वारा रचित कविता के संग खो पड़ता है.... मीना दी की बातों से सहमत हूं.. वाकई आप चुन चुन कर शब्दों से सुंदर चित्र उकेरी है.. बधाई इस खुबसूरत कविता के लिए..!

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  4. शब्दों के माध्यम से बड़ी खूबसूरती से
    उस पल को ज़िवंत कर दिया आप ने
    बहुत ही शानदार रचना
    आप की कल्पना शक्ति बेमिसाल है
    और उस पर शब्दों की जादूगरी कमाल
    बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिये

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  5. बहुत ही खूबसूरत रचना
    बेहतरीन

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  6. गजब का काव्य शिल्प और कोमलतम भावनाओं से सजी शानदार रचना --- एक सुहाना चित्र उकेरा है रचना में -- बधाई श्वेता बहन --

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  7. एक बार पुनः शब्दों की खूबसूरत रवानी
    प्रकृति की बेजोड़ कहानी आपकी जबानी

    साधुवाद सुंदर चित्रण के लिए।

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  8. बहुत ही लाजवाब...
    मन्त्रमुग्ध नभ, हवाएं बादामी जुल्फों से खेलती, धुंधला सूरज, मखमली किरणें ...वाहवाह श्वेता जी !
    कमाल का शब्दचित्र उकेरती अद्भुत रचना...

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  9. वाह!!कल्पना के घोड़े पर सवार आपकी इन्द्रधनुषी कविता लाजवाब ।

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  10. बहुत बहुत सुंदर श्वेता!!
    शब्दों का सुंदर ताना बाना
    जिनसे मनभावन
    रंग काव्य रच डारा
    अभिराम, निरंतर सुंदर।
    शुभ दिवस ।
    ढेर सा स्नेह ।बहुत बहुत सुंदर श्वेता!!
    शब्दों का सुंदर ताना बाना
    जिनसे मनभावन
    रंग काव्य रच डारा
    अभिराम, निरंतर सुंदर।
    शुभ दिवस ।
    ढेर सा स्नेह ।
    नयनाभिराम इंद्रधनुषी रचना।

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  11. बहुत सुंदर..
    कोमल भावों को इन्द्रधनुष के रंगों से सराबोर रचना..

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  12. बेहद खूबसूरत रचना‎.👌👌

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  13. बहुत ही खूबसूरत रचना, स्वेता। मन के भावों को खूबसूरती से कैसे पिरोया जाए ये कोई तुमसे सीखे!बहुत सुंदर।

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  14. बहुत ही सुन्दर रचना ,शब्दों की तुलिका से कविताओं के इंद्रधनुष ....वाह बहुत ख़ूब नीतू जी

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  15. प्राकृति के विभिन्न रंग समेटे ग़ज़ब का शब्द इंद्र्धनुश बनाया है ... लाजवाब रचना ...

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  16. वाह बेहद ही शानदार लेखन

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  17. Very beautiful composition, painting the feelings of the mind beautifully! Someone learned from you! Very beautiful. Waah Waah 100 times. Waiting for your Book. with all these compositions.

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