Wednesday, 10 July 2019

मौन


तुम्हारे मौन के ईद-गिर्द
परिक्रमा मेरे मन की
ज्यों धुरी में नाचती धरती
टोहती सूरज का पारा

तुम्हारे मौन के सन्नाटे में
मन बहरा,ध्यानस्थ योगी
हर आवाज़ से निर्लिप्त
तुम पुकारो नाम हमारा

मौन में पसरी विरक्ति 
टीसता है,छीलता मन 
छटपटाता आसक्ति में
चाहता नेह का कारा

तुम्हारे मौन से विकल
जार-जार रोता मेरा मन
आस लिये ताकता है 
निःशब्द मन का किनारा

#श्वेता सिन्हा


17 comments:

  1. तुम्हारे मौन से विकल
    जार-जार रोता मेरा मन
    आस लिये ताकता है
    निःशब्द मन का किनारा

    बेहतरीन रचना श्वेताजी

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  2. "छटपटाता आसक्ति में
    चाहता नेह का कारा" ...रुमानियत, संवेदनशीलता और मार्मिकता का कॉकटेल .....
    वैसे तो मन ... मौन हो कर भी बहुत कुछ बुदबुदाता है ना ... बस लौकिक श्रवण-तंत्र से परे सुनना होगा ...

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  3. बेहद हृदयस्पर्शी

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  4. छटपटाता आसक्ति में
    चाहता नेह का कारा

    बहुत गहरा भाव।
    सादर

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  5. आस लिये ताकता है
    निःशब्द मन का किनारा...आशा की टिमटिमाती लौ की बाहरी रेख में कांपते मन की कसक!!! बहुत सुंदर!!!!!

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  6. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (12-07-2019) को "भँवरों को मकरन्द" (चर्चा अंक- 3394) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  7. बहुत समय से आपकी कविता किसी के इर्द गिर्द ही घूम रही सी लगती है।
    साझा करने के लिए आभार.

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  8. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज गुरुवार 11 जुलाई 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  9. "तुम पुकारो नाम हमारा"

    गर प्रयास कर पहल कर के देखा जाए पहले इधर से ही नाम पुकारा जाए।

    "निःशब्द मन का किनारा"
    यानि मौन इधर भी, फिर कौन तोड़े मौन को, मैं का अहम ही हर द्वंद का कारण है।

    बस ऐसे ही पंक्तियाँ जो ज्यादा बोल रही है उनका रहस्य खोजा तो लगा कुछ ऐसा भी हो सकता है.. 😍
    बहुत अभिनव अभिव्यक्ति है प्यारी सी पर गमज़दा।

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  10. बेहतरीन सृजन प्रिय श्वेता दी
    सादर

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  11. तुम्हारे मौन से विकल
    जार-जार रोता मेरा मन
    आस लिये ताकता है
    निःशब्द मन का किनारा

    ...लाज़वाब अहसास। बहुत सुंदर।

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  12. तुम्हारे मौन के सन्नाटे में
    मन बहरा,ध्यानस्थ योगी
    हर आवाज़ से निर्लिप्त
    तुम पुकारो नाम हमारा
    वाह!!!
    मन जो चाहता नेह का कारा....बहुत ही लाजवाब अभिव्यक्ति....मन में प्रेम की छटपटाहट पर पहल की उम्मीद प्रिय से...

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  13. तुम्हारे मौन के सन्नाटे में
    मन बहरा,ध्यानस्थ योगी
    हर आवाज़ से निर्लिप्त
    तुम पुकारो नाम हमारा
    बेहद खूबसूरत भावाभिव्यक्ति ..👌👌

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  14. अत्यंत हृदयग्राही रचना श्वेता जी ! बहुत सुन्दर !

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  15. तुम्हारे मौन के सन्नाटे में
    मन बहरा,ध्यानस्थ योगी
    हर आवाज़ से निर्लिप्त
    तुम पुकारो नाम हमारा...
    अहसासों की मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति।

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  16. मौन में पसरा कोलाहल
    प्रेम में डुबकी सा अहसास 💐
    सुंदर कविता।

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  17. तुम्हारे मौन से विकल
    जार-जार रोता मेरा मन
    आस लिये ताकता है
    निःशब्द मन का किनारा
    कसकते मन की विरह वेदना को दर्शाती भावपूर्ण रचना प्रिय श्वेता | हार्दिक शुभकामनायें |

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