Monday, 13 January 2020

कैसे जीवन जीना हो?


नैनों में भर खारे मोती 
विष के प्याले पीना हो,
आशाओं के दीप बुझा के
कैसे जीवन जीना हो..?

मन के चाहों को छू-छूकर
चिता लहकती धू-धूकर
भावों की राख में लिपटा मन
कैसे चंदन-सा भीना हो?

आशाओं के दीप बुझा के
कैसे जीवन जीना हो..?

भोर सिसकती धुंध भरी
दिन की आरी भी कुंद पड़ी
गीली सँझा के आँगन में
कैसे रातें पशमीना हो?

आशाओं के दीप बुझा के
कैसे जीवन जीना हो...?

जर्जर देह के आवरण के
शिथिल हिया के आचरण के
अवशेष बचे हैं झँझरी कुछ
कैसे अंतर्मन सीना हो...?

आशाओं के दीप बुझा के
कैसे जीवन जीना हो...?

#श्वेता सिन्हा

13 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में मंगलवार 14 जनवरी 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. जी आभारी हूँ दी आपका स्नेह बना रहे।
      सादर शुक्रिया।

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  2. Replies
    1. जी आभारी हुँ सर।
      सादर शुक्रिया।

      Delete
  3. नैनों में भर खारे मोती
    विष के प्याले पीना हो,
    आशाओं के दीप बुझा के
    कैसे जीवन जीना हो..?
    बहुत खूब रचना प्रिय श्वेता. बहुत दिन बाद सरस, मधुर काव्य ,जो तुम्हारी विशेष पहचान है , पढ़कर अच्छा लगा । लोहड़ी और संक्रांति पर मेरी हार्दिक शुभकामनायें तुम्हारे लिए। 🌹🌹🌹🌹

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  4. ऐसे ही जीने की आदत, तुझे डालनी ही, अब होगी,
    अरमानों की चिता जलाकर, उमर यूँ ही, ढालनी ही होगी.
    शिक़वे-गिले सब, ताक पे रख दे, लब सीने का हुनर सीख ले,
    या फिर दिल में छुपा, बग़ावत, तुझे पालनी ही अब होगी.


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  5. भोर सिसकती धुंध भरी
    दिन की आरी भी कुंद पड़ी
    गीली सँझा के आँगन में
    कैसे रातें पशमीना हो?
    बहुत ही बेहतरीन कविता।एक एक शब्दों को जोड़ कर पूरी बात लिखी गई है।

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  6. बेहतरीन सृजन स्वेता।सस्नेह

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  7. श्वेता दी यहीं जीवन हैं। कुछ खट्टा और कुछ मीठा। बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

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  8. वाह!श्वेता , सुंदर भावाभिव्यक्ति !

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  9. जर्जर देह के आवरण के
    शिथिल हिया के आचरण के
    अवशेष बचे हैं झँझरी कुछ
    कैसे अंतर्मन सीना हो...

    बहुत खूब......

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  10. आशाओं के दीप बुझा के
    कैसे जीवन जीना हो...?
    बेहद सुन्दर, अप्रतिम सृजन....

    मन के चाहों को छू-छूकर
    चिता लहकती धू-धूकर
    भावों की राख में लिपटा मन
    कैसे चंदन-सा भीना हो?
    वाह!!!!
    अद्भुत शब्दविन्यास... बहुत ही उत्कृष्ट

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आपकी लिखी प्रतिक्रियाएँ मेरी लेखनी की ऊर्जा है।

शुक्रिया।

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