Wednesday, 14 March 2018

अधूरा टुकड़ा

बूढ़े पीपल की 
नवपत्रों से ढकी 
इतराती शाखों पर
कूकती कोयल की तान
हृदय केे सोये दर्द को जगा गयी
हवाओं की हँसी से बिखरे 
बेरंग पलाश के मुरझाये फूल,
मन के बंद कपाट पर
दस्तक देते उदास सूखे पत्तों की आहट
 बोगनबेलिया से लदी टहनियोंं
की फुसफुसाहट
महुआ की गंध से व्याकुल हो
इक चेहरा तसव्वुर के
दबी परतों से झाँकने लगता है 
 कुछ सपनों के बीज बोये थे जो
आबादी से दूर पहाड़ की तलहटी में 
उससे उगे
खपरैल महल के छत पर
चाँदनी की सुगंध में भीगी नशीली रात,
मौसम के बेल में 
सुनहरे फूलों से खिलती लड़ियाँ,
इत्र छिड़कते जुगनुओं की टोली
रुह की खुशबू से बेसुध आशियां में
सपनीली अठखेलियों को,
इक रात पहाड़ से उतरी बरसात 
ने ढक लिया अपनी बाहों में
छन से टूटकर खो गयी 
धीमी लौ में जलती लालटेन 
घुप्प गीले अंधेरे में ढूँढती रही 
सपनों के बिखरे लम्स
धुँधलायी आँखों ने देखी
चुपचाप लौटती हुई परछाईयाँ
ऊँची पहाड़ों की गुम होती पगडंडी पर,
जब भी कभी बैठती हूँ
तन्हाई में 
अनायास ही
उस महल के मलबे में 
तलाशने लगती हूँ
मासूम एहसास का 
अधूरा टुकड़ा।

   -श्वेता सिन्हा

24 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 15.03.2018 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2910 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

    ReplyDelete
  2. जी अति आभार आपका आदरणीय। बहुत शुक्रिया।
    सादर।

    ReplyDelete
  3. कल्पनाओं के संसार का रंग,और प्रकृति के कण कण में संवाहित संवेदनशील संवेग, कितना अनुपम और गहरा होता है कि खूवसुरत रचना पढ़ने वालों को भी एकवारगी अचंभित कर देता है कि क्या यह सम्भव है ! सब कुछ है यहां। धन्यवाद।

    ReplyDelete
  4. प्रकृति की प्रतिपल होने वाली गतिविधियों के साथ मन के संवेगों का बड़ी खूबसूरती से वर्णन किया है . बहुत खूब श्वेता जी.

    ReplyDelete
  5. निसर्ग और मन की भावनाओं का बहुत ही अद्भुत तालमेल किया बैठाया हैं तुमने, स्वेता। बहुत सुंदर

    ReplyDelete
  6. बहुत खुबसूरत अहसास!

    ReplyDelete
  7. तन्हाई में
    अनायास ही
    उस महल के मलबे में
    तलाशने लगती हूँ
    मासूम एहसास का
    अधूरा टुकड़ा।
    खूबसूरती से पिरोई गई रचना हेतु बधाई।

    ReplyDelete
  8. खूबसूरत वर्णन किया है ..... बहुत खूब

    ReplyDelete
  9. तन्हाई में अक्सर मन खोए हुए की तलाश पर निकल ही जाता है...भावपूर्ण अभिव्यक्ति श्वेता जी। जितनी बार पढ़ा, नए अर्थ के साथ मन में उतर गई। रचना का अंत लाजवाब !!!!!
    जब भी कभी बैठती हूँ
    तन्हाई में
    अनायास ही
    उस महल के मलबे में
    तलाशने लगती हूँ
    मासूम एहसास का
    अधूरा टुकड़ा।

    ReplyDelete
  10. वाह!!श्वेता , बहुत ही खूबसूरत भावपूर्ण रचना ।

    ReplyDelete
  11. मौसम मैं होते परिवर्तन को सूक्ष्मता के साथ चित्रित किया गया है। साथ ही सृजक मन शांत चित्त होकर अपने कल्पनालोक में प्रकृति को अधिक से अधिक किस प्रकार महसूस करता है इस भाव को पूरा सम्मान मिला है।
    रचना का भाव पक्ष बेजोड़ है।
    बधाई एवं शुभकामनाएं। लिखते रहिए।

    ReplyDelete
    Replies
    1. कृपया मैं को में पढ़ लीजिएगा। सधन्यवाद।

      Delete
  12. मखमली एहसास का खूबसूरत अंदाजे बयाँ !!!!!!!!!! बधाई प्रिय श्वेता बहन |

    ReplyDelete
  13. वाह अप्रतिम लेखन कहता सुनता कुछ सुगबुग करता सा
    सपने के भीगे ख्वाबो को धीरे से चुनता सा ।

    ReplyDelete
  14. अनुभूति और अहसास सूक्ष्म से सूक्ष्म भावों का प्रकृति के साथ इतना सुंदर मनोगत विलक्षण वर्णन निशब्द क्या लिखूं शब्द नही मिलते।
    अप्रतिम अद्भुत अद्वितीय

    ReplyDelete
  15. आपकी लिखी रचना आज के "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 18 मार्च 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  16. कल्पनाओं के विविध रंग कविता में उतर आयी है.बहुत सुंदर.

    ReplyDelete
  17. लाजवाब रचना... पढते ही हर पंक्ति आगे बढ़ने की उत्सुकता जगाती...मन का प्रकृति से तारतम्य स्थापित करवाती...और फिर अद्भुत कल्पनालोक
    सैर....
    वाह!!!!
    बहुत ही सुन्दर...

    ReplyDelete
  18. कोमल एहसासों से भरी रचना. सुंदर प्रस्तुति .

    ReplyDelete
  19. निमंत्रण

    विशेष : 'सोमवार' १९ मार्च २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने सोमवारीय साप्ताहिक अंक में आदरणीया 'पुष्पा' मेहरा और आदरणीया 'विभारानी' श्रीवास्तव जी से आपका परिचय करवाने जा रहा है।

    अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    ReplyDelete
  20. बूढ़े पीपल तले अनगिनत मासूम अहसास सृजित होते हैं ... उनमें से कुछ पूरे हो जाते हैं कुछ अधूरे रहते हैं ...
    पलश बोगेमविलिया और महुआ की प्राकृति नैसर्गिकता से उतरी रचना अधूरे lams तलाशती है ...
    सुंदर रचना है ...

    ReplyDelete
  21. वाह ! क्या बात है ! खूबसूरत प्रस्तुति ! बहुत खूब आदरणीया ।

    ReplyDelete
  22. Dapatkan Bonus Rollingan Casino Hingga 0.7%
    Bonus New Member / Cashback Hingga 10%
    Langsung Saja Gabung Dengan Kami www.bolavita.pro
    Untuk Info, Bisa Hubungi :
    BBM : BOLAVITA
    wechat : bolavita
    whatup : 6281377055002
    Email : cs@bolavita .com

    ReplyDelete

ब्लॉग की सालगिरह.... चाँद की किरणें

सालभर बीत गये कैसे...पता ही नहीं चला। हाँ, आज ही के दिन १६फरवरी२०१७ को पहली बार ब्लॉग पर लिखना शुरु किये थे। कुछ पता नहीं था ब्लॉग के बा...

आपकी पसंद