दिल की हर बात जो
हम कह नही पाते है
कभी फूल कभी बादल
कभी चाँद कभी तारों से
अपने दिल का हाल सुनाते है
हवाओं को चूमकर
हज़ारों पैगाम भिजवाते है
सुर्ख गुलाब बेताबियों की
खूबसूरत निशानी है
लजीली पलकों की
धड़कते सीने की
बेताबी भरे सुबह
बेचैन करती शामों
कश्मकश में उलझे
नेह डोर में बंधते
रेशमी एहसास की
अनकही कहानी है
रख कर पंखुड़ियों में
सारे अनकहे लफ्ज़
भरकर प्यार की
खुमारी से लबरेज़
हाल ए दिल भेजा है
शायद वो समझ पाए
लरजते जज़्बातों को
गुलाब एक फूल नहीं
एक प्यार भरे दिल की
बेजुबान कहानी है
#श्वेता🍁
ये कविता पढ़कर सच में ऐसा लगता है जैसे कोई अपने दिल की सारी अनकही बातें धीमे-धीमे सामने रख रहा हो। मुझे ये ख्याल बहुत अच्छा लगा कि हम कभी फूलों से, कभी बादलों से, और कभी चाँद-तारों से अपना हाल कह देते हैं।
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