Search This Blog

Thursday, 13 July 2017

छू गया नज़र से

चित्र साभार गूगल
----
छू गया नज़र से वो मुझको जगमगा गया
बनके हसीन ख्वाब निगाहों में कोई छा गया

देर तलक साँझ की परछाई रही स्याह सी
चाँद देखो आज खुद ही मेरे छत पे आ गया

चुप बहुत उदास रही राह की वीरानियाँ
वो दीप प्रेम के लिए हर मोड़ को सजा गया

खिले लबों का राज़ क्या लोग पूछने लगे
धड़कनों के गीत वो सरगम कोई सुना गया

डरी डरी सी चाँदनी थी बादलों के शोर से
तोड़ कर के चाँद वो दामन में सब लगा गया

      #श्वेता🍁

18 comments:

  1. 😊😊😊😊🙏🙏suprb

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी,.बहुत शुक्रिया आपका।

      Delete
  2. बहुत उम्दा ग़ज़ल

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत आभार शुक्रिया आपका लोकेश जी।

      Delete
  3. एहसासों को बखूबी उतारा है शब्दों में....

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी, बहुत आभार आपका संजय जी।

      Delete
  4. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 14 जुलाई 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार शुक्रिया आपका दी।

      Delete
  5. मिलन के उपरांत प्रेम के सागर में उठी मौजों का मनोहारी प्रस्तुतीकरण करती मनमोहक रचना। श्वेता जी का कल्पनालोक मखमली एहसासों का आसमान है। बहुत-बहुत बधाई मन को प्रफुल्लित करती , ताजगी देती रचना के लिए बधाई श्वेता जी। यूं ही लिखते रहिए।

    ReplyDelete
    Replies
    1. आभार शुक्रिया आपका रवींद्र जी।सही कहा आपने.मेरी कल्पना की दुनिया बहुत अलग है।
      आपके शुभकामनाओं के लिए बहुत आभार।

      Delete
  6. सुन्दर रचना ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार ऋतु जी।

      Delete

  7. बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार कविता जी।

      Delete
  8. बहुत ही सुन्दर ...

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार सुधा दी।

      Delete
  9. वाह ! क्या बात है ! लाजवाब प्रस्तुति ! बहुत खूब आदरणीया ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत आभार शुक्रिया आपका सर।

      Delete