Saturday, 1 August 2026

सॉंझ की बाती



सॉंझ की बाती
​ सिर्फ एक लौ नहीं,
​एक नन्ही-सी उम्मीद है,
जो अंधेरे को चुनौती नहीं देती,
केसरी सॉंझ की चादर में
रेशमी फुलकारी करती है।
​माटी की देह में उमगती,
यह बाती पुल है,
गुज़रे हुए लम्हों और ख़ामोशी के बीच।
बीते कल की यादें जिलाती,
और आने वाले कल की रंगोली सजाती ।
सारी बोझिलता ,थकान, 
एकाकीपन समर्पित कर
अंधेरे को
सॉंझ की बाती
मौन प्रार्थना में
 प्रज्जवलित करती है
भोर के प्रति विश्वास...।
----------
-श्वेता

मैं से मोक्ष...बुद्ध

मैं  नित्य सुनती हूँ कराह वृद्धों और रोगियों की, निरंतर देखती हूँ अनगिनत जलती चिताएँ परंतु नहीं होता  मेरा हृदयपरिवर...