सॉंझ की बाती
सिर्फ एक लौ नहीं,
एक नन्ही-सी उम्मीद है,
जो अंधेरे को चुनौती नहीं देती,
केसरी सॉंझ की चादर में
रेशमी फुलकारी करती है।
माटी की देह में उमगती,
यह बाती पुल है,
गुज़रे हुए लम्हों और ख़ामोशी के बीच।
बीते कल की यादें जिलाती,
और आने वाले कल की रंगोली सजाती ।
सारी बोझिलता ,थकान,
एकाकीपन समर्पित कर
अंधेरे को
सॉंझ की बाती
मौन प्रार्थना में
प्रज्जवलित करती है
भोर के प्रति विश्वास...।
----------
-श्वेता

सॉंझ की बाती
ReplyDelete सिर्फ एक लौ नहीं,
भोर की मुस्कुराहट
का भान कराती है
साधुवाद
वंदन