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Sunday, 25 June 2017

उम्मीदों की फेहरिश्त

आज के ख्वाहिशें इंतज़ार में पड़ी होती है
कल की उम्मीदों की फेहरिश्त बड़ी होती है

बहते है वक्त की मुट्ठियों से फिसलते लम्हें
कम होती ज़िदगी के हाथों में घड़ी होती है

क्यों गिरबां में अपने कोई झाँकता नहीं है
निगाहें ज़माने की झिर्रियों में खड़ी होती है

टूटना ही हश्र रात के ख्वाबों का फिर भी
नहीं मानती नींदें भी ज़िद में अड़ी होती है

श्वेत श्याम रंगीन तस्वीरें बंद किताबों में
मृत हो चुकी यादों की जिंदा कड़ी होती है

          #श्वेता🍁

26 comments:

  1. बहुत उम्दा ग़ज़ल

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    1. बहुत बहुत आभार.शुक्रिया आपका लोकेश जी।

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  2. श्वेत श्याम रंगीन तस्वीरें बंद किताबों में
    मृत हो चुकी यादों की जिंदा कड़ी होती है

    ---बस्स!! सब कुछ तो कह दिया!

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    Replies
    1. आभार शुक्रिया बहुत बहुत संजय जी।

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  3. बहुत ही सुंदर।

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    Replies
    1. बहुत आभार शुक्रिया ज्योति जी।

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  4. बहते है वक्त की मुट्ठियों से फिसलते लम्हें
    कम होती ज़िदगी के हाथों में घड़ी होती है
    बहुत ख़ूब! श्वेता जी क्या ख़ूब लिखा है प्रभावी रचना आभार। "एकलव्य"

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    Replies
    1. बहुत बहुत आभार शुक्रिया आपका ध्रुव जी।धन्यवाद।

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  6. Replies
    1. 😊😊 जी, शायद...
      शुक्रिया संजय जी।

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  7. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 28जून 2017 को लिंक की गई है...............http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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    Replies
    1. बहुत आभार शुक्रिया पम्मी जी।

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  8. ग़ज़ल का हर शेर माक़ूल वज़्न के साथ। ख़ूबसूरत जज़्बातों को उभारा है श्वेता जी ने।बधाई एवं शुभकामनाऐं!

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  9. ग़ज़ल का हर शेर माक़ूल वज़्न के साथ। ख़ूबसूरत जज़्बातों को उभारा है श्वेता जी ने।बधाई एवं शुभकामनाऐं!

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    Replies
    1. बहुत बहुत आभार शुक्रिया आपका रवींद्र जी।
      शुभकामनाओ के लिए हृदय से धन्यवाद आपका।

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  10. बहुत ही सुन्दर सार्थक गजल...
    लाजवाब....

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    Replies
    1. बहुत बहुत आभार और दिल से शुक्रिया आपका
      सुधा जी।

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  11. वाह ! लाजवाब ! हर शेर कुछ कहता हुआ । बहुत खूब आदरणीया ।

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    1. बहुत बहुत बहुत आभार शुक्रिया सर आपका।आपकी सराहना मेरे लिए आशीष समान है।बहुत धन्यवाद आपका।

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  12. वाह श्वेता जी ! बहुत सुन्दर !

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  13. बहुत आभार आपका साधना जी।
    आपका हृदय सेक्षस्वागत है मेरी पोस्ट पर।

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